सामान्य ज्ञान

पुराणों के रचयिता माने जाते है – लोमहर्ष एवं उनके पुत्र उग्रश्रवा
भारत का नेपोलियन कहते है – समुद्र गुप्त
समुद्र गुप्त के दरबार का मुख्य कवि था – हरिषेण ( इलाहबाद प्रसस्ति की रचना इन्होने ही की थी )
चन्द्रगुप्त प्रथम का उत्तराधिकारी था – समुद्र गुप्त ( चंद्रगुप्त प्रथम का पुत्र )
मयूर सिंघासन का निर्माण किसने कराया था – शाहजहाँ ने
गुप्ता वंश का संस्थापक था – श्री गुप्त
गुप्ता साम्राज्य का उदय तीसरी सदी में कहा हुआ था – कौशाम्बी में
चंद्रगुप्त द्वितीय ने कौन से उपाधि धारना की – विक्रमादित्य की ( इसलिए वह चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के नाम से भी जाना जाता है )
किसके काल हूणों ने आक्रमण किया – स्कंदगुप्त
श्रीगुप्त का उत्तराधिकारी था – घटोत्कच्छ
दक्षिण भारत में शैव धर्म का प्रचार प्रसार किया था – नयनार एवं अलवर संतो ने
कनिष्क के दरबार का महान चिकित्सक था – चरक 
चन्द्रगुप्त प्रथम ने गुप्त संवत की शुरुआत की।
कुषाणों ने भारत में सर्वाधिक शुद्धता वाले स्वर्ण सिक्के जारी किये।
कुषाण वंश का सबसे शक्तिशाली और प्रतापी राजा कनिष्क था।
भारत का आइंस्टीन नागार्जुन को कहा जाता है।
गुप्तकाल को संस्कृत साहित्य का स्वर्णयुग कहा जाता है।
सर्वप्रथम गुप्त कलाकारो ने ही शिव के अर्द्धनारीश्वर रूप की रचना की थी।
वराहमिहिर गुप्त काल के एक प्रसिद्ध खगोलशास्त्री थे।
प्रसिद्ध अणु सिद्धांत का प्रतिपादन सर्वप्रथम गुप्त काल में ही हुआ था।
गुप्त काल की अजंता की गुफाये बौद्ध धर्म की महायान शाखा से सम्बन्ध है।
गुप्ता कालीन सम्राट वैष्णव धर्म के अनुयाई थे।
नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना कुमार गुप्त प्रथम ने की थी।
गुप्त वंश का अंतिम शासक भानुगुप्त था।
पंचतंत्र – विष्णु शर्मा
मृक्षकटिकम – शूद्रक
बृहत सिद्धांत – वराहमिहिर
पंचसिद्धांतिका – वराहमिहिर
ब्रम्ह सिद्धांत – ब्रम्हगुप्त